भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों द्वारा अद्यतन

 वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट द्वारा १५ सितंबर, २०२० को देइथोर, कार्बी आंगलोंग (असम) में "बांस चारकोल उत्पादन और ब्रिकेटिंग" पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   21 September 2020

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा दिनांक ०९ सितम्बर, २०२० को हिमालयन दिवस के आयोजन पर एक रिपोर्ट   हि.व.अ.सं.:   21 September 2020

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा दिनांक १६ सितम्बर, २०२० को विश्व ओज़ोन परत संरक्षण दिवस के आयोजन पर एक रिपोर्ट   हि.व.अ.सं.:   21 September 2020

 वर्षा वन अनुसन्धान संस्थान, जोरहाट में राजभाषा हिंदी के प्रयोग हेतु उत्साहवर्धक वातावरण बनाने और कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए दिनांक १२ से १८ सितम्बर, २०२० के मध्य हिंदी सप्ताह का आयोजन किया गया   व.व.अ.सं.:   21 September 2020

 पसुमई विकटन, चेन्नई के सहयोग से वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर द्वारा १३ से २७ अगस्त, २०२० के दौरान "कृषि आय बढ़ने के लिया वृक्षारोपण" विषय पर ऑनलाइन प्रशिक्षण व्याख्यान श्रृंखला के आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   21 September 2020

 वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु १-१४ सितम्बर २०२० तक हिंदी पखवाडा समारोह मनाया गया  व.आ.वृ.प्र.सं.:   21 September 2020

 वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट में १८ सितंबर, २०२० को "विश्व बांस दिवस" मनाया गया   व.व.अ.सं.:   21 September 2020

 दिनांक १७ सितम्बर, २०२० को वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक के आयोजन पर संक्षिप्त प्रतिवेदन  व.अ.सं.:   17 September 2020

 विस्तार प्रभाग, वन अनुसंधान संस्थान देहरादून द्वारा "एग्रोफोरेस्ट्री उत्पादों का बाजार तंत्र" विषय पर दिनांक १५-०९-२०२० को आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण पर एक रिपोर्ट  व.अ.सं.:   17 September 2020

 शुष्क वन अनुसन्धान संस्थान, जोधपुर में हिंदी दिवस पर हिंदी सप्ताह (१४ से २१ सितम्बर, २०२०) का समारम्भ  शु.व.अ.सं.:   17 September 2020

 वन उत्पादकता संस्थान, रांची द्वारा "औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए क्यूपीएम का महत्व" विषय पर ३० जुलाई, २०२० को आयोजित मासिक संगोष्ठी पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   16 September 2020

 वन उत्पादकता संस्थान, रांची द्वारा "वृक्ष ऊतक संवर्धन की समस्याएं" विषय पर २८ जुलाई, २०२० को आयोजित मासिक संगोष्ठी पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   16 September 2020

 वन उत्पादकता संस्थान, रांची द्वारा "वनों का महत्व और जलवायु परिवर्तन के लिए इनकी प्रासंगिकता" विषय पर १६ जून, २०२० को आयोजित मासिक संगोष्ठी पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   16 September 2020

 वन अनुसन्धान संस्थान, देहरादून में ०१ सितम्बर, २०२० से १४ सितम्बर, २०२० तक हिंदी अनुभाग के सौजन्य से हिंदी पखवाड़े के आयोजन पर एक संक्षिप्त प्रतिवेदन   व.अ.सं.:   15 September 2020

 भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद्, देरादून में १४ सितम्बर, २०२० से हिंदी पखवाड़ा का शुभारम्भ   भा.वा.अ.शि.प.:   15 September 2020

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भा.वा.अ.शि.प.की प्रौद्योगिकी

  जूनीपेरस पॉलीकार्पस (हिमालयन पेन्सिल सीडार) की बीज प्रौद्योगिकी

जुनिपेरस पाॅलीकार्पोस, सी.कोच उत्तर पश्चिम हिमालयन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देशज शंकु वृक्ष है, जिसे सामान्यतः हिमालयन पेंसिल सिडार के नाम से जाना जाता है। इस प्रजाति के बीजों में प्रसुप्ति होती है, जो इसके अंकुरण को प्रभावित करती है। 

  कुटकी बहुगुणन हेतु वृहद-प्रसार तकनीक

पिकोरिजा कुरूआ, रायल एक्स बेंथ जिसे सामान्यतः कुटकी के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाना महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है, जिसकी उच्च शीतोष्ण क्षेत्रों (2700 मी. से ऊपर) में वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता है।

  मुशाकबला बहुगुणन हेतु बृहद-प्रसार तकनीक

वैलरियाना जटामांसी, जोन्स जिसे सामान्यतः मुशाकबला के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है तथा वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता रखता है।

  देवदार निष्पत्रक (एक्ट्रोपिस देवदारे प्राउट) का एकीकृत कीट प्रबंधन

देवदार (सिडेरस देओदारा), उत्तर-पश्चिम हिमालय का एक अति मूल्यित एवं बहुल शंकु प्रजाति है, यह कुछ अंतरालों पर निष्पत्रक, इक्ट्रोपिस देओदारी प्राउट (लेपीडोप्टेरा: जिओमैट्रिडि) से प्रभावित होता है। यह प्रमुख नाशी-कीट देवदार वनों की अल्पवयस्क फसलों को गम्भीरता से प्रभावित करता है।

  बागवानी रोपण के साथ शीतोष्ण औषधीय पादपों का अंतरफसलीकरण

उच्च पहाड़ी शीतोष्ण क्षेत्रों के बागानों में अंतरालों का बेहतर उपयोजन किया जा सकता है तथा चुनिंदा वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय पादपों के अंतरफसलीकरण से बागानों द्वारा आर्थिक लाभ की वृद्धि की जा सकती है।

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