भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों द्वारा अद्यतन

 वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज द्वारा "मोरिंगा लीफ आधारित उत्पादों" पर वेबिनार की रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   30 July 2021

 तटीय पारिस्थितिकी तंत्र केंद्र, विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश द्वारा 16 जुलाई 2021 को वन जैव विविधता संस्थान, हैदराबाद के सह भागीदारी में आयोजित "अंडमान के मैंग्रोव्स" पर वेबिनार की एक रिपोर्ट  व.जै.सं.:   30 July 2021

 वन जैव विविधता संस्थान, हैदराबाद द्वारा आयोजित सुश्री रूबी पटेल, वैज्ञानिक-बी द्वारा "भारतीय मिट्टी में कार्बन स्टॉक" पर मासिक संगोष्ठी की एक रिपोर्ट  व.जै.सं.:   30 July 2021

 वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट द्वारा 22 जुलाई, 2021 को डिब्रूगढ़ स्थित क्रोमा बायोटेक एलएलपी के साथ एक लाइसेंस समझौता पर एक रिपोर्ट  व.व.अ.सं.:   30 July 2021

 तटीय पारिस्थितिकी तंत्र केंद्र, विशाखापत्तनम , आंध्र प्रदेश द्वारा "मैंग्रोव के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस" ​​के आयोजन की एक रिपोर्ट  त.पा.तं.कें:   30 July 2021

 वन जेनेटिक रिसोर्सेज एंड ट्री इम्प्रूवमेंट एनविस रिसोर्स पार्टनर , वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर द्वारा "मैंग्रोव इकोसिस्टम 2021 के संरक्षण" के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के आयोजन पर एक रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   29 July 2021

 वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून और केन्द्रीय विद्यालय, भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून परिसरों में क्रमशः 22 और 23 जुलाई, 2021 को   व. उ. सं:   29 July 2021

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ,शिमला द्वारा 27 जुलाई, 2021 को ताबो, जिला लाहौल और स्पीति में आयोजित 'कोल्ड डेजर्ट में कीट कीट और रोग प्रबंधन' विषय के तहत "भारत का अमृत महोत्सव" के आयोजन पर एक रिपोर्ट  हि.व.अ.सं:   28 July 2021

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा आयोजित वीवीके, लेह के तहत कारगिल वन प्रभाग, लद्दाख यूटी के कार्यालय में "इंटरैक्शन-कम ट्रेनिंग प्रोग्राम" पर एक रिपोर्ट  हि.व.अ.सं.:   28 July 2021

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा सुरू घाटी, कारगिल, लद्दाख में भा.वा.अ.शि.प. की 'प्रकृति' योजना के तहत वैज्ञानिक छात्र बातचीत कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट  हि.व.अ.सं.:   26 July 2021

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा 21 जुलाई 2021 को "वन महोत्सव 2021" के आयोजन पर एक रिपोर्ट   हि.व.अ.सं.:   26 July 2021

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा 12 जुलाई 2021 को "भारत का अमृत महोत्सव" के आयोजन पर एक रिपोर्ट  हि.व.अ.सं.:   26 July 2021

 वन उत्पादकता संस्थान, रांची द्वारा 15 जुलाई 2021 को "भारत का अमृत महोत्सव"के आयोजन पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं:   23 July 2021

 वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर द्वारा 19 जुलाई 2021 को "कदंबा आधारित कृषि वानिकी प्रणाली" पर आयोजित प्रशिक्षण सह प्रदर्शन कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   23 July 2021

 वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर द्वारा 16 जुलाई, 2021 को "सागौन की खेती में प्रगति: आनुवंशिक संसाधन और प्रौद्योगिकी" पर आयोजित वेबिनार की कार्यवाही पर एक रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   23 July 2021

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भा.वा.अ.शि.प.की प्रौद्योगिकी

  जूनीपेरस पॉलीकार्पस (हिमालयन पेन्सिल सीडार) की बीज प्रौद्योगिकी

जुनिपेरस पाॅलीकार्पोस, सी.कोच उत्तर पश्चिम हिमालयन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देशज शंकु वृक्ष है, जिसे सामान्यतः हिमालयन पेंसिल सिडार के नाम से जाना जाता है। इस प्रजाति के बीजों में प्रसुप्ति होती है, जो इसके अंकुरण को प्रभावित करती है। 

  कुटकी बहुगुणन हेतु वृहद-प्रसार तकनीक

पिकोरिजा कुरूआ, रायल एक्स बेंथ जिसे सामान्यतः कुटकी के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाना महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है, जिसकी उच्च शीतोष्ण क्षेत्रों (2700 मी. से ऊपर) में वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता है।

  मुशाकबला बहुगुणन हेतु बृहद-प्रसार तकनीक

वैलरियाना जटामांसी, जोन्स जिसे सामान्यतः मुशाकबला के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है तथा वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता रखता है।

  देवदार निष्पत्रक (एक्ट्रोपिस देवदारे प्राउट) का एकीकृत कीट प्रबंधन

देवदार (सिडेरस देओदारा), उत्तर-पश्चिम हिमालय का एक अति मूल्यित एवं बहुल शंकु प्रजाति है, यह कुछ अंतरालों पर निष्पत्रक, इक्ट्रोपिस देओदारी प्राउट (लेपीडोप्टेरा: जिओमैट्रिडि) से प्रभावित होता है। यह प्रमुख नाशी-कीट देवदार वनों की अल्पवयस्क फसलों को गम्भीरता से प्रभावित करता है।

  बागवानी रोपण के साथ शीतोष्ण औषधीय पादपों का अंतरफसलीकरण

उच्च पहाड़ी शीतोष्ण क्षेत्रों के बागानों में अंतरालों का बेहतर उपयोजन किया जा सकता है तथा चुनिंदा वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय पादपों के अंतरफसलीकरण से बागानों द्वारा आर्थिक लाभ की वृद्धि की जा सकती है।

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