आगामी आयोजन

 वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून में 2020 में लघु अवधि के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का कैलेंडर  updated: 24 January 2020

 १८-२० फरवरी,२०२० के मध्य वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज द्वारा वानिकी प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण हेतु वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन   updated: 20 January 2020

 "गैर लकड़ी वन उत्पाद (प्लांट ओरिजिन) के मूल्य संवर्धन और विपणन: : एनटीएफपी उत्पाद / औषधीय पौधे" पर प्रशिक्षण कार्यक्रम अब पुनर्निर्धारित तिथियों के अनुसार २९ जनवरी से १६ फरवरी, २०२० तक शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर द्वारा आयोजित किया जाएगा  updated: 14 January 2020

 ३ फरवरी, २०२० से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित हरित कौशल विकास कार्यक्रम के प्रशिक्षण का आर.एफ.आर.आई., जोरहाट द्वारा संचालन किया जायेगा  updated: 06 January 2020

 काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलुरू का वर्ष 2019-20 के लिए लघु अवधि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम ।  updated: 13 May 2019

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला के वर्ष 2019-20 के लिए प्रशिक्षण कैलेंडर।  updated: 30 April 2019

 वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर का वर्ष 2019-20 के लिए लघु अवधि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम ।   updated: 25 April 2019

  वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून का लघु अवधि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम।  updated: 13 March 2019

भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों द्वारा अद्यतन

 राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल के छात्रों की १५ और २० जनवरी २०२० को शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर में शैक्षिक यात्रा की रिपोर्ट   श.व.अ.सं.:   24 January 2020

 भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन और प्रसार के लिए माघ मेला -२०२० में वन अनुसंधान केंद्र - इको-पुनर्वास, प्रयागराज द्वारा स्थापित वानिकी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और जागरूकता सृजन स्टाल पर एक रिपोर्ट  व.अ.कें. ई.पु.:   23 January 2020

 वन विज्ञान केंद्र हाजीपुर, जदुआ, पटना में दिनांक ०७.०१.२०२० को वन उत्पादकता संस्थान, रांची के निदेशक के निर्देशन में “औषधीय पौधशाला तकनीक, औषधीय खेती एवं रख रखाव” विषय पर वन विज्ञान केंद्र (वी.वी.के.) एवं भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् द्वारा वित्त पोषित आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पर रिपोर्ट   व. उ. सं.:   21 January 2020

 १० जनवरी २०२० को वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर में आयोजित "वन वृक्ष फसलों में विकास को बढ़ावा देने वाले एक्टिनोबैक्टीरिया" विषय पर मासिक संगोष्ठी पर रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   20 January 2020

 २३ दिसंबर, २०१९ को वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर में आयोजित डॉ. एस. केदारनाथ मेमोरियल लेक्चर (के.एम.एल.-२०१९) की रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   20 January 2020

 ०७ से ०९ जनवरी, २०२० के मध्य वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर में आयोजित "जूनियर रेंजर्स- कनेक्टिंग स्टूडेंट्स विद नेचर" के प्रशिक्षण पर रिपोर्ट  व.आ.वृ.प्र.सं.:   20 January 2020

 जी.डी. मेमोरियल कॉलेज, कुड़ी भगतासनी, जोधपुर के बी.ऐस.सी. के छात्रों के १०.१.२०२० को शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के यात्रा कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट  श.व.अ.सं.:   15 January 2020

 वन प्रशिक्षण संस्थान, पिंजौर, हरियाणा के उप रेंज अधिकारी प्रशिक्षुओं के ४.१.२०२० के शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर में भ्रमण दौरे पर एक रिपोर्ट   श.व.अ.सं.:   15 January 2020

 राज्य वन सेवा केंद्रीय अकादमी, कोयम्बटूर के राज्य वन सेवा अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों के दिनांक २७.१२.२०१९ को शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर भ्रमण दौरे पर रिपोर्ट   श.व.अ.सं.:   15 January 2020

 वन जैवविविधता संस्थान, हैदराबाद द्वारा ०९ जनवरी २०२० को केंद्रीय विद्यालय संगठन (के.वी.एस.), डंडीगल नंबर -१ के छात्रों के समूह के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम (प्रकृति के अंतर्गत ) पर एक रिपोर्ट  व.जै.सं.:   14 January 2020

 रोंगबोंग घाट, निलिप ब्लॉक, कार्बी आंगलोंग (आसाम) में वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट(असम) द्वारा ७ जनवरी, २०२० को एन.एम.एच.एस. परियोजना - “आसाम के कार्बी आंग्लोंग जिले के चयनित वन फ्रिंज गाँवों में बाँस चारकोल उत्पादन और ब्रिकेटिंग द्वारा जीविका को बढ़ावा देने” के अंतर्गत बाँस चारकोल प्रोडक्शन विषय पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट   व.व.अ.सं.:   13 January 2020

 हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला के सम्मेलन हॉल में ३०.१२.२०१९ को आयोजित संस्थान स्तरीय मासिक अनुसंधान संगोष्ठी की कार्यवाही पर एक रिपोर्ट   हि.व.अ.सं.:   10 January 2020

 ६ जनवरी २०२० को तटीय पारिस्थितिकी तंत्र केंद्र, विशाखापत्तनम (त.पा.तं.कें) द्वारा विशाखापत्तनम में स्थित केन्द्रीय विद्यालयों के छात्रों के बीच “प्रकृति कार्यक्रम: एक वैज्ञानिक-छात्र कनेक्ट पहल” के आयोजन पर एक रिपोर्ट  त.पा.तं.कें:   08 January 2020

 १८-२४ दिसंबर, २०१९ के दौरान पश्चिम बंगाल के पुटुसुरी मेले में रांची के वन उत्पादकता संस्थान की भागीदारी पर एक रिपोर्ट  व. उ. सं.:   08 January 2020

 १८/१२/२०१९ से २०/१२/२०१९ तक "वानिकी प्रथाओं में जैव-उर्वरकों और जैव-कीटनाशकों के अनुप्रयोग" विषय पर हिमालयी वन अनुसंधान संस्थान (HFRI) द्वारा अन्य हितधारकों के लिए आयोजित तीन दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम की एक रिपोर्ट  हि.व.अ.सं.:   06 January 2020

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भा.वा.अ.शि.प.की प्रौद्योगिकी

  जूनीपेरस पॉलीकार्पस (हिमालयन पेन्सिल सीडार) की बीज प्रौद्योगिकी

जुनिपेरस पाॅलीकार्पोस, सी.कोच उत्तर पश्चिम हिमालयन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देशज शंकु वृक्ष है, जिसे सामान्यतः हिमालयन पेंसिल सिडार के नाम से जाना जाता है। इस प्रजाति के बीजों में प्रसुप्ति होती है, जो इसके अंकुरण को प्रभावित करती है। 

  कुटकी बहुगुणन हेतु वृहद-प्रसार तकनीक

पिकोरिजा कुरूआ, रायल एक्स बेंथ जिसे सामान्यतः कुटकी के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाना महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है, जिसकी उच्च शीतोष्ण क्षेत्रों (2700 मी. से ऊपर) में वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता है।

  मुशाकबला बहुगुणन हेतु बृहद-प्रसार तकनीक

वैलरियाना जटामांसी, जोन्स जिसे सामान्यतः मुशाकबला के नाम से जाना जाता है, यह पश्चिमी हिमालय में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधी पादप है तथा वाणिज्यिक कृषि हेतु महत्वपूर्ण संभाव्यता रखता है।

  देवदार निष्पत्रक (एक्ट्रोपिस देवदारे प्राउट) का एकीकृत कीट प्रबंधन

देवदार (सिडेरस देओदारा), उत्तर-पश्चिम हिमालय का एक अति मूल्यित एवं बहुल शंकु प्रजाति है, यह कुछ अंतरालों पर निष्पत्रक, इक्ट्रोपिस देओदारी प्राउट (लेपीडोप्टेरा: जिओमैट्रिडि) से प्रभावित होता है। यह प्रमुख नाशी-कीट देवदार वनों की अल्पवयस्क फसलों को गम्भीरता से प्रभावित करता है।

  बागवानी रोपण के साथ शीतोष्ण औषधीय पादपों का अंतरफसलीकरण

उच्च पहाड़ी शीतोष्ण क्षेत्रों के बागानों में अंतरालों का बेहतर उपयोजन किया जा सकता है तथा चुनिंदा वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय पादपों के अंतरफसलीकरण से बागानों द्वारा आर्थिक लाभ की वृद्धि की जा सकती है।

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